उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सर्वेक्षण 2017 (प्रथम चरण) राज्य विकासशील शोध केंद्र (DCRC), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सर्वेक्षण 2017 (प्रथम चरण)
राज्य विकासशील शोध केंद्र (DCRC), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU)



U.P के दिमाग में क्या है ?

(First time on this web in Hindi for U.P, India)

उत्तर प्रदेश, त्रिलोक सिंह और दिग्वीजय विश्वकर्मा (दिल्ली विश्वविद्यालय); भारतीय राज्य की सत्ता निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जब यहाँ चुनाव होता है तो पूरे देश की नजर इस पर बनी रहती है. दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्था “विकासशील राज्य शोध केंद्र” द्वारा आयोजित U.P, भारत की चुनावी राजनीति में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया गया जिसमे हमारी टीम को आगरा की नौ (9) विधानसभा चुनाव क्षेत्रो में चुनावी रुझान का सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई हमारी टीम में कुल १३ सदस्य थे और टीम ने ३ दिन में आगरा की (9) विधानसभाओ का सर्वे किया वो साथ ही हमने वहां के विद्यालयो जिनमे शामिल है : प्राथमिक विद्यालय लाल दरवाजा, सिकरी आगरा आदि, की स्थिति की भी जानकारी ली. वंहा के प्रिंसिपल से बातचीत में पाया की वंहा की हालत बहुत ही निंद्न्ये है (e.g. लगभग 180 स्टूडेंट्स पर केवल 1 टीचर और वो भी सरकारी नही) इसे दूर करने की सख्त अवश्यकता है.

हमने न सिर्फ चुनावी रुझान को देखा बल्कि यह भी जानने की कोशिश की कि वहां के लोग कितने साक्षर हैं? लोगो में जागरूकता कितनी है? आजादी के पहले की लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था में मतदाता की भूमिका क्या थी? और अभी कैसी है ? क्या वो परिवर्तन के लिए सजग है या नहीं? इन मुद्दों को भी जानने का प्रयास किया. इस सर्वेक्षण का सबसे चिंता जनक पहलु ये रहा की वंहा की महिलाओ की स्थिति बेहद ख़राब दिखी उनकी साक्षरता लगभग शून्य है और वो आज भी यही कहती है की जो हमारे पति या बेटे कहेंगे उनको हम वोट दे देंगे हमारी टीम ने शहरी और ग्रामीण दोनों जगहों पे सर्वे किया. और पाया की यह चुनाव काफी रोमांचक होने वाला है जिसकी सभी डाटा उपरोक्त संस्था द्वारा सभी प्रेस में पब्लिश की जाएगी. अभी, यह डाटा हमे पब्लिश करने का अधिकार नही है इसलिए हमने अभी इसको गोपनीय रखा है लेकिन हम सभी यंहा अपना अनुभव शेयर करने की कोशिस की है.

शहरो में बैठ कर हम ये समझ लेते हैं कि मतदाता जागरूक हो गये और सोच -समझ के वोट डालते हैं पर हमें शहरों में शोर मचाने के बजाय हमें इन इलाको में जागरूकता फ़ैलाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि हमारी लोकतंत्र मजबूत हो सके हमारा देश सबसे बडा लोकतंत्र तो है लेकिन सबसे अच्छा नही लेकिन हमारी कोशिशें इसे अच्छा बना सकती है. इन इलाको में मतदात आज भी असमंजस में है क्योकि वो अशिक्षित वो बेरोजगार है. लेकिन एक बात तो स्पष्ट है की लोगो में गुस्सा, रोष , और नाराजगी बहुत है अपनी शासन व्यवस्था के प्रति , नेताओ के प्रति आदि. हमारी टीम को लगभग हर बड़े नेता की प्रशंसा और जबरदस्त आलोचना सुनने को मिला



सर्वे के दौरान हमने यह ज्ञात किया की वंहा खासकर महिलाओं और युवाओ आदि की शिक्षा न के बराबर है और वे सभी अपनी आने वाली सरकारो से उम्मीद और सहयोग की आकांक्षा रखते हैं. यह देखना बेहद दिल्चस्प होगा की आने वाली चुनाव में जीत किसकी होती है? आजकल कुछ मडिया द्वारा गलत ओपिनियन पोल दिखाई जाती है जो की जनता के माइंड को डाइवर्ट कर देती है अतः आपसभी से अनुरोध है की इससे बचे और DCRC द्वारा पब्लिश चुनावी रुझान को जरुर देखें क्यूंकि हमने यह घर-घर जा कर यह जानने की कोशिस की कि U.P के दिमाग में क्या चल रहा है.

नोट : हां, यह बात सही है की सर्वे का डाटा हमारे पास है लेकिन हमें संस्था द्वारा अभी पब्लिश करने की अनुमति नही मिली है क्यूंकि अभी यह सर्वे जारी है पूरी U.P में और हमारी टीम इसपर निरंतर नजर बनाई हुई है. हम DCRC के डायरेक्टर, प्रोफेसर सुनील सर और DU को आभार व्यक्त करते हैं की उन्होंने इतने बरे स्तर पर इस सर्वे का आयोजन किया.

धन्यवाद

त्रिलोक सिंह और दिग्वीजय विश्वकर्मा.

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